पंचायत और निकाय चुनाव के बाद अब डिस्ट्रिक प्लानिंग कमिटी के चुनाव होने हैं, fसको लेकर संबंधित विभागों ने होमवर्क पूरा कर लिया है
देहरादून: उत्तराखंड में पंचायत चुनाव और निकाय चुनावों के बाद अब जिला योजना समिति (DPC) के चुनावों का बेसब्री के इंतज़ार हो रहा है. निश्चित तौर पर जिला योजना समिति जब अपने अस्तित्व में आती है, तो क्षेत्र में विकास योजनाओं को रफ्तार मिलती है. अब जिला योजनाओं की बैठकों को मुहूर्त रूप देने के लिए पंचायत राज विभाग ने अपना होमवर्क पूरा कर लिया है. शासन को जिला योजना समिति के चुनाव करवाने को लेकर अपनी तरफ से पूरी हरी झंडी दे दी है. अब जल्द ही शासन स्तर पर भी DPC चुनाव को लेकर आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी.
जल्द होंगे DPC के चुनाव: उत्तराखंड पंचायती राज निदेशक IAS निधि यादव ने बताया कि DPC के गठन के लिए शहरी निकाय और ग्राम पंचायतों के चुनाव अनिवार्य होते हैं. वहां से चुन कर आए सदस्यों में से ही जिलों में डिस्ट्रिक्ट प्लानिंग कमिटी का गठन होता है. उन्होंने बताया कि-
हमारे द्वारा शासन से अनुरोध किया गया है. जिलों में जिलाधिकारियों द्वारा परिसीमन की कार्रवाई की जानी है तो वहीं परिसीमन के बाद राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा DPC के चुनाव करवा दिए जाएंगे. जैसे ही शासन अधिसूचना जारी करेगा, उसके बाद विधिवत DPC चुनाव की प्रक्रिया सम्पन्न करवाई जाएगी.
-निधि यादव, निदेशक पंचायती राज-ग्राम प्रधानों को देने होंगे प्लान, बंद होगी डुप्लीकेसी: उत्तराखंड में इन पंचायत चुनावों के बाद काफी कुछ बदलने जा रहा है. विशेष तौर पर अब तक जो मनरेगा में काम करने के तौर तरीके थे, उनमें बड़ा बदलाव होने जा रहा है. पंचायती राज निदेशक निधि यादव ने बताया कि हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा का नाम बदल कर लाई गई G RAM G योजना के तहत अब ग्राम पंचायतें एनुअल प्लान के तहत से दिए हाई प्रस्तावों के अनुरूप ही काम कर पाएंगे.
निदेशक पंचायती राज निधि यादव ने बताया कि-
सभी ग्राम पंचायतों को ये प्लान या प्रस्ताव पीपल प्लान कैंपेन जो कि 2 अक्टूबर से लेकर 31 जनवरी तक चलता है, उस दौरान पंचायतों को अगले वित्तीय वर्ष के प्लान के रूप में देना होगा. विकास कार्यों की डुप्लीकेसी को रोकने के लिए पंचायत राज की योजनाओं और मनरेगा की योजनाओं को मर्ज किया गया है. पहले अक्सर देखा जाता था कि जो कार्य पंचायती राज की योजनाओं के होते थे, उन्हें ही मनरेगा में दिखा दिया जाता था. इस तरह से एक ही काम को बार-बार दिखाने से नए विकास कार्य नहीं हो पाते थे.
-निधि यादव, निदेशक पंचायती राज-ग्राम पंचायतों का आत्मनिर्माभर होना जरूरी: उत्तराखंड पंचायती राज निदेशक निधि यादव का कहना है कि अब राज्य में ई गवर्नेंस काफ़ी मजबूत हो चुका है और ग्राम पंचायतों को डिजिटली इंडेक्स किया गया है. उन्होंने बताया कि कोई भी ग्राम प्रधान अपनी परफ़ॉर्मेंस देख सकता है. भारत सरकार और राज्य सरकार की वेबसाइट पर जाकर प्रधान अपने स्कोर के साथ साथ अपने कमजोर पहलू को भी देख कर एनालाइज कर सकते हैं. इसके अलावा राज्य सरकार की पंचायती राज विभाग की अधिकृत वेबसाइट पर ग्राम प्रधानों को कई तरह की जानकारियां मिल सकती हैं. कई तरह के ट्रेनिंग के मॉड्यूल ग्राम प्रधान यहां से सीख सकते हैं. इसमें सीखा जा सकता है कि ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की प्लानिंग कैसे की जा सकती है, प्रस्ताव कैसे तैयार किए जाते हैं. फंड फंक्शन और प्रोसेस का पूरा नॉलेज प्रधान विभाग की वेबसाइट से ले सकता है. इस तरह से एक ग्राम पंचायत कितनी बेहतर बनेगी, ये उसके ग्राम प्रधान पर निर्भर करता है.
वित्त आयोग की है स्पष्ट गाइडलाइन: वहीं इसके अलावा निदेशक पंचायती राज निधि यादव ने एक और जानकारी दी है कि 16 वें वित्त आयोग की स्पष्ट गाइडलाइन दी गई है कि जब तक कोई भी ग्रामीण क्षेत्र या ग्राम पंचायत OSR (Own Source Revenue) जनरेट नहीं करेगा, यानी ख़ुद के आय के साधन नहीं जुटाएगा, तब तक उस ग्राम पंचायत को 20% फ़ंड जारी नहीं होगा. यानी ग्राम पंचायत केवल सरकार के भरोसे रही तो सीधे सीधे 20 फ़ीसदी की कटौती तय है. उन्होंने बताया कि भारत सरकार द्वारा जारी किए गए पिछले कुछ सालों के आंकड़े बताते हैं कि दक्षिण भारत की कई ग्राम पंचायतों ने एक हज़ार करोड़ रुपये तक का ख़ुद का राजस्व कमाया है. इसी भावना को आगे बढ़ाने के लिए लगातार सरकारें काम कर रही हैं.
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