बंगाल समेत अन्य राज्यों में चुनाव होते ही उत्तराखंड में ‘जिहाद’ और ‘धर्मांतरण’ मामले पर सियासत तेज. रिपोर्ट- किरणकांत शर्मा.
देहरादून: उत्तराखंड में एक बार फिर ‘लव जिहाद’, ‘लैंड जिहाद’, धर्मांतरण और मंदिर-मस्जिद जैसे मुद्दों ने सियासी और सामाजिक माहौल को गरमा दिया है. बंगाल समेत अन्य राज्यों के चुनाव खत्म होने के बाद देवभूमि उत्तराखंड में हिंदुत्व और जनसांख्यिकीय परिवर्तन को लेकर बहस तेज हो गई है. सड़क पर बजरंग दल जैसे संगठन खुलकर प्रदर्शन कर रहे हैं, तो वहीं मंचों से खुद सीएम पुष्कर सिंह धामी लगातार सख्त चेतावनी देते दिखाई दे रहे हैं. राज्य सरकार का दावा है कि प्रदेश में सुनियोजित तरीके से धर्मांतरण और भूमि कब्जाने की कोशिशें हो रही हैं. जबकि, विपक्ष इसे समाज को बांटने की राजनीति बता रहा है.
बता दें कि, बीती 17 मई को देहरादून की सड़कों पर बजरंग दल और अन्य हिंदू संगठनों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया था. प्रदर्शनकारियों के हाथों में ‘लव जिहाद बंद करो’, ‘लैंड जिहाद नहीं चलेगा’ और ‘धर्मांतरण रोको’ जैसे नारे लिखी तख्तियां थीं. प्रदर्शन के चलते कई इलाकों में लंबा जाम लग गया और आम लोगों को भारी गर्मी के बीच घंटों परेशानियों का सामना करना पड़ा. संगठन के कार्यकर्ताओं का आरोप है कि उत्तराखंड में सुनियोजित तरीके से धार्मिक संतुलन बदलने की कोशिश की जा रही है. सरकार को इस पर अधिक कठोर कदम उठाने चाहिए.
सीएम धामी का बड़ा बयान, धर्मांतरण करेंगे तो जेल जाएंगे: वहीं, इन सब के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी थारू राणा और बुक्सा जनजाति बाहुल्य क्षेत्र में आयोजित जनसभा के दौरान धर्मांतरण के मुद्दे पर बेहद सख्त रुख अपनाते नजर आए. रविवार 17 मई को उधम सिंह नगर के सितारगंज पहुंचे सीएम ने मंच से साफ कहा कि उत्तराखंड में जबरन या प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसे लोगों की जगह जेल में होगी.
“प्रदेश में धर्मांतरण करने और कराने वाले जेल भेजे जाएंगे. राज्य सरकार ने सख्त धर्मांतरण कानून इसलिए बनाया है ताकि, देवभूमि की मूल संस्कृति और जनजातीय पहचान सुरक्षित रह सकें. थारू, राणा और बुक्सा जैसी जनजातियां उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत हैं. सरकार उनकी परंपराओं को बचाने के लिए प्रतिबद्ध है.“
– पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री –
सीएम पुष्कर धामी ने महाराणा प्रताप का जिक्र करते हुए कहा कि ‘सनातन के रक्षक रहे महाराणा प्रताप के वंशज अपनी संस्कृति से जुड़े रहें, यह सरकार की जिम्मेदारी है.’ साथ ही लैंड जिहाद का मुद्दा उठाते हुए कहा कि ‘हरि और नीली चादर डालकर सरकारी भूमि कब्जाने का षड्यंत्र रचा जा रहा था, लेकिन सरकार ने कठोर कार्रवाई करते हुए 12 हजार एकड़ से ज्यादा भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया है.’
उन्होंने दो टूक कहा कि ‘उत्तराखंड में ‘थूक जिहाद’ और ‘लव जिहाद’ नहीं चलेंगे.’ दरअसल, तराई क्षेत्र में ईसाई मिशनरियों की ओर से कथित धर्मांतरण की घटनाओं के सामने आने के बाद सरकार और प्रशासन दोनों अलर्ट मोड पर दिखाई दे रहे हैं. जिला प्रशासन को पहले ही ऐसे मामलों पर कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए जा चुके हैं.
हरिद्वार में मस्जिद की मीनारों पर कार्रवाई, प्रशासन की चेतावनी के बाद हटाना शुरू: उधर, हरिद्वार जिले की सुल्तानपुर नगर पंचायत में बनी मस्जिद को लेकर विवाद भी गहराता जा रहा है. प्रशासन की सख्ती के बाद अब मस्जिद प्रबंधन ने खुद ऊंची मीनारों को हटाने का काम शुरू कर दिया है. जिला प्रशासन का कहना है कि मस्जिद निर्माण में मानकों और अनुमति प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया.
हरिद्वार जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के मुताबिक, सोशल मीडिया पर मस्जिद की ऊंची मीनारों और निर्माण को लेकर खबरें सामने आने के बाद प्रशासन ने मामले का संज्ञान लिया था. पहले मस्जिद प्रबंधन को नोटिस जारी किया गया, लेकिन समय पर जवाब नहीं मिलने और निर्माण नहीं हटाने पर एसडीएम के नेतृत्व में टीम मौके पर पहुंची प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि अवैध निर्माण नहीं हटाया गया, तो परिसर को सील कर दिया जाएगा.
इसके बाद मस्जिद प्रबंधकों ने खुद मीनार हटाने का काम शुरू कर दिया. बताया जा रहा है कि करीब दस महीने पहले भी यह मस्जिद चर्चा में आई थी. आरोप था कि उत्तराखंड की सबसे बड़ी मस्जिद के रूप में इसका निर्माण किया जा रहा था. इसकी मीनारों की ऊंचाई निर्धारित मानकों से कहीं ज्यादा थी. प्रशासन की मानें तो निर्माण के लिए न तो जिला प्रशासन और न ही विकास प्राधिकरण से अनुमति ली गई थी.
धर्म परिवर्तन के बाद एससी प्रमाण पत्र निरस्तीकरण की संस्तुति: सरकार ऐसे सभी मामले में बेहद सख्ती दिखाती दिख रही है. वहीं उधम सिंह नगर जिले के गदरपुर क्षेत्र में धर्म परिवर्तन से जुड़ा एक मामला प्रशासनिक कार्रवाई के केंद्र में आ गया है. जांच के बाद एक व्यक्ति के अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र को निरस्त करने की संस्तुति जिला स्क्रूटनी समिति को भेजी गई है.मामले की शुरुआत ग्राम मजारशीला निवासी अरविंद सैनी की शिकायत से हुई, जिसमें आरोप लगाया गया था कि गांव में अवैध रूप से चर्च संचालित कर धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है. प्रशासन ने जांच शुरू की और उप जिलाधिकारी ऋचा सिंह के अनुसार, जांच में ऐसे तथ्य सामने आए. जिनसे संकेत मिला कि संबंधित व्यक्ति ने कथित रूप से धर्म परिवर्तन किया है.
सोशल मीडिया गतिविधियों और सार्वजनिक पोस्ट को भी जांच का हिस्सा बनाया गया. प्रशासन के मुताबिक, संबंधित व्यक्ति को साल 2019 में एससी प्रमाण पत्र जारी किया गया था, लेकिन अब संयुक्त जांच रिपोर्ट के आधार पर उसके निरस्तीकरण की सिफारिश की गई है. अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश 1950 और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप की जा रही है.
कांग्रेस का पलटवार, कहा- सरकार मुद्दों से ध्यान भटका रही: इन तमाम घटनाओं और सरकार की सख्ती के बीच कांग्रेस ने धामी सरकार पर तीखा हमला बोला है. कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के पास विकास और रोजगार जैसे मुद्दों पर बताने के लिए कुछ नहीं है, इसलिए समाज को हिंदू-मुस्लिम मुद्दों में उलझाया जा रहा है.
“उत्तर प्रदेश में कई संगठनों की गतिविधियों पर नियंत्रण लगाया गया, लेकिन उत्तराखंड में बजरंग दल खुलेआम प्रदर्शन और उग्र बयानबाजी कर रहा है. खुद मुख्यमंत्री लव जिहाद और थूक जिहाद जैसे शब्दों का इस्तेमाल करेंगे, तो ऐसे संगठनों का मनोबल बढ़ेगा और सामाजिक तनाव पैदा होगा. धार्मिक ध्रुवीकरण के जरिए जनता का ध्यान महंगाई, बेरोजगारी और मूलभूत समस्याओं से हटाया जा रहा है. जबकि, बीजेपी सरकार इसे सांस्कृतिक संरक्षण और कानून व्यवस्था का मामला बता रही है.“
– गरिमा मेहरा दसौनी, कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता –
उत्तराखंड में बढ़ती धार्मिक राजनीति के बीच गहराया माहौल: उत्तराखंड में इन दिनों धर्मांतरण, मस्जिद निर्माण, अतिक्रमण और जनसंख्या असंतुलन जैसे मुद्दे केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि अब ये बड़े राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन चुके हैं. एक तरफ सरकार और हिंदू संगठन इसे देवभूमि की पहचान बचाने की लड़ाई बता रहे हैं, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे चुनावी और सांप्रदायिक राजनीति करार दे रहा है.
आने वाले समय में ये मुद्दे और ज्यादा राजनीतिक रूप ले सकते हैं. क्योंकि, राज्य में लगातार धार्मिक पहचान, भूमि कब्जे और जनसंख्या परिवर्तन को लेकर बयानबाजी तेज होती जा रही है. इसके अलावा चुनाव भी नजदीक है. फिलहाल, उत्तराखंड की राजनीति में ‘धर्मांतरण’ और ‘जिहाद’ जैसे शब्द सबसे ज्यादा चर्चाओं में हैं. इन पर सियासी घमासान लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है.
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