देहरादून। उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में महिला स्वयं सहायता समूह आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत माध्यम बनकर उभर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की हजारों महिलाएं आज इन समूहों के माध्यम से स्वरोजगार और छोटे व्यवसायों से जुड़ रही हैं।
राज्य सरकार और विभिन्न विकास एजेंसियों द्वारा महिलाओं को वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे महिलाएं हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी और अन्य गतिविधियों में भागीदारी बढ़ा रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि स्वयं सहायता समूह केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का भी माध्यम बन रहे हैं। महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ रहा है और वे परिवार के निर्णयों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
कई सफल समूह अब अपने उत्पादों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी बेच रहे हैं। इससे उनकी आय में वृद्धि हुई है और नए रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं।
राज्य सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में अधिक से अधिक महिलाओं को इन समूहों से जोड़ना है ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और मजबूत बनाया जा सके।
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