बजरंग सेतु पर श्रद्धालुओं को तय SOP के तहत ही एंट्री मिल पाएगी. जिसके लिए कुछ मानक बनाए हैं, जिनको लागू किया जायेगा.![]()
देहरादून: ऋषिकेश में लक्ष्मण झूला के पास बनाए गए बजरंग सेतु को लेकर SOP तैयार की जा रही है. इसके तहत इस पुल के उपयोग और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाए जाने से जुड़े मानक तय होंगे. हालांकि पुल के बीच का हिस्सा सामान्य आवाजाही के लिए पहले जैसी स्थिति में रहेगा, लेकिन कांच से बने पैदल मार्ग पर जाने के लिए श्रद्धालुओं को शुल्क देना पड़ सकता है. वहीं कांवड़ यात्रा के दौरान कांच वाले हिस्से को पूरी तरह बंद रखने की भी तैयारी है. करीब 69.20 करोड़ रुपये की लागत से बने इस 132.30 मीटर लंबे पुल का निर्माण वर्ष 2022 में शुरू हुआ था. पांच परतों वाले टफेंड ग्लास से बने फुटपाथ के कांच को निर्माण के दौरान कई बार नुकसान पहुंचने के बाद सुरक्षा और निगरानी को लेकर भी विशेष व्यवस्था की जा रही है.
ऋषिकेश में गंगा के ऊपर बना बजरंग सेतु अब सिर्फ एक पुल नहीं, बल्कि तीर्थनगरी का नया आकर्षण बन गया है. लक्ष्मण झूला के विकल्प के तौर पर तैयार किए गए इस आधुनिक सस्पेंशन ब्रिज को तकनीक, सुरक्षा और पर्यटन. तीनों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है. लेकिन अब इस पुल के इस्तेमाल को लेकर ऐसी व्यवस्था बनाई जा रही है, जिसके तहत हर कोई पुल के हर हिस्से में अपनी मर्जी से आवाजाही नहीं कर सकेगा. बजरंग सेतु का सामान्य हिस्सा आम आवाजाही के लिए उपलब्ध रहेगा. लेकिन पुल के दोनों किनारों पर बनाए गए कांच के फुटपाथ को लेकर अलग व्यवस्था की जा रही है.
इस हिस्से में प्रवेश के लिए श्रद्धालुओं और पर्यटकों को शुल्क देना होगा. यानी अगर कोई व्यक्ति गंगा के ऊपर बने पारदर्शी कांच के रास्ते से चलने का अनुभव लेना चाहता है, तो उसे इसके लिए निर्धारित किराया चुकाना पड़ सकता है.सबसे बड़ी बात यह है कि कांवड़ यात्रा के दौरान कांच वाला हिस्सा पूरी तरह बंद रखा जाएगा. कांवड़ यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पैदल आवाजाही करते हैं और इस दौरान पुल पर भीड़ का दबाव काफी बढ़ जाता है. ऐसे में कांच से बने हिस्से को कांवड़ियों के लिए प्रतिबंधित रखने की तैयारी है.
इसका मतलब यह होगा कि कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालु बजरंग सेतु के सामान्य हिस्से का इस्तेमाल तो कर सकेंगे, लेकिन कांच के फुटपाथ पर प्रवेश नहीं मिलेगा.दरअसल बजरंग सेतु को बेहद आधुनिक तकनीक के साथ तैयार किया गया है. यह करीब 132.30 मीटर लंबा और लगभग 8.60 मीटर चौड़ा है. पुल के दोनों ओर पैदल यात्रियों के लिए कांच के फुटपाथ बनाए गए हैं, जबकि मुख्य हिस्से में आवाजाही की व्यवस्था की गई है. पैदल मार्ग में इस्तेमाल किया गया कांच सामान्य कांच नहीं है. यहां पांच परतों वाले टफेंड ग्लास का इस्तेमाल किया गया है.
हर परत करीब 12 मिलीमीटर मोटी है और कुल मिलाकर कांच की मोटाई लगभग 60 मिलीमीटर तक है. हालांकि पुल के निर्माण के दौरान कांच को लेकर कई बार सवाल भी उठे. इस साल अप्रैल में पुल के एक छोर पर लगे कांच को नुकसान पहुंचने की तस्वीरें सामने आई थीं. इसमें कांच की ऊपरी परत क्षतिग्रस्त हुई थी, जबकि नीचे की चार परतें सुरक्षित थीं. इससे पहले जनवरी में निर्माण कार्य के दौरान एक कर्मचारी के हाथ से हथौड़ा गिरने के कारण भी कांच को नुकसान पहुंचा था, जिसे बाद में ठीक किया गया. इन घटनाओं के बाद पुल पर CCTV कैमरे लगाने और बेहतर रोशनी की व्यवस्था करने की बात कही गई.
इसके बाद मई 2026 में भी बजरंग सेतु के कांच को नुकसान पहुंचने की खबर सामने आई. ऐसे में अब पुल के कांच वाले हिस्से की सुरक्षा, निगरानी और मेंटेनेंस को लेकर विभाग के सामने बड़ी चुनौती है. यही वजह है कि इस हिस्से के उपयोग को लेकर SOP तैयार की जा रही है. इसमें यह तय किया जाएगा कि कितने लोगों को एक साथ प्रवेश दिया जाएगा, किस तरह की निगरानी होगी और कांच वाले हिस्से के रखरखाव का खर्च कैसे जुटाया जाएगा. साथ ही इसके किनारों को सुरक्षित करने के लिए इसे ऊंचा करने जैसे कामों को भी किया गया है.
दुनिया के कई देशों में इस तरह के आकर्षण वाले पुलों के लिए विशेष व्यवस्था की जाती है. कांच वाले हिस्से में प्रवेश के लिए टिकट की व्यवस्था होती है. जिससे वहां आने वाले लोगों की संख्या नियंत्रित करने के साथ-साथ मेंटेनेंस और संचालन की व्यवस्था भी बेहतर तरीके से की जा सके.
-पंकज कुमार पांडे, सचिव, लोक निर्माण विभाग-
बजरंग सेतु की कहानी भी अपने आप में काफी लंबी है. पुराने लक्ष्मण झूला पुल को सुरक्षा कारणों से पैदल आवाजाही के लिए बंद किए जाने के बाद नए पुल की जरूरत महसूस हुई. करीब 90 साल पुराने लक्ष्मण झूला को असुरक्षित घोषित किए जाने के बाद श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के सामने आवाजाही की बड़ी समस्या खड़ी हो गई थी. इसी के बाद आधुनिक तकनीक से नए पुल के निर्माण की योजना तैयार की गई.
गौर हो कि बजरंग सेतु का निर्माण वर्ष 2022 में शुरू हुआ. परियोजना पर करीब 69.20 करोड़ रुपये की लागत निर्धारित की गई. वर्ष 2023 में निर्माण कार्य का करीब 62 प्रतिशत हिस्सा पूरा होने की जानकारी सामने आई थी और उस समय जुलाई 2023 तक काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था. हालांकि परियोजना को पूरा होने में अपेक्षा से अधिक समय लगा और निर्माण कार्य लंबे समय तक जारी रहा. इस पुल को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह केवल आवाजाही का माध्यम न होकर पर्यटन का नया केंद्र भी बने. पुल से गुजरने वाले लोग गंगा और आसपास के पहाड़ी क्षेत्र का दृश्य देख सकेंगे.
एक ओर जहां सामान्य मार्ग आवाजाही की जरूरत पूरी करेगा, वहीं कांच वाला हिस्सा पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होगा.लेकिन आकर्षण के साथ-साथ सुरक्षा भी सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी. कांच वाले हिस्से में लोगों की संख्या नियंत्रित करना, भारी भीड़ को रोकना, कांवड़ यात्रा जैसे बड़े आयोजनों के दौरान इसे बंद रखना और समय-समय पर कांच की जांच करना जरूरी होगा. इसके अलावा, पुल के कांच वाले हिस्से को नुकसान पहुंचाने वाली घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था भी मजबूत करनी होगी.अब विभाग की तैयारी है कि बजरंग सेतु का संचालन स्पष्ट SOP के तहत किया जाए.
सामान्य हिस्से में आवाजाही सुचारू रहेगी, जबकि कांच वाले हिस्से के लिए अलग नियम लागू होंगे. टिकट व्यवस्था के जरिए भीड़ को नियंत्रित किया जाएगा और मेंटेनेंस का खर्च जुटाने की कोशिश होगी.यानी आने वाले दिनों में ऋषिकेश आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बजरंग सेतु एक नया अनुभव लेकर आएगा, लेकिन इस अनुभव के लिए जेब भी ढीली करनी होगी. वहीं कांवड़ यात्रा के दौरान गंगा के ऊपर बने इस पारदर्शी रास्ते पर कदम रखना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा.
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