ऋषिकेश में बजरंग सेतु के कांच वाले हिस्से पर चलने के लिए अदा करनी फीस, डामर वाले हिस्से से आवाजाही रहेगी मुफ्त![]()
ऋषिकेश: लक्ष्मणझूला पुल के पास नव निर्मित बजरंग सेतु पर आवाजाही को लेकर अहम फैसला लिया गया है. अब सेतु के कांच (ग्लास) वाले हिस्से पर चलने के लिए लोगों को निर्धारित शुल्क देना होगा. जबकि, डामर (सामान्य) वाले हिस्से पर आमजन की आवाजाही पूरी तरह निशुल्क रहेगी. इस व्यवस्था का मकसद पुल के विशेष ग्लास डेक के रखरखाव और समय-समय पर होने वाली मरम्मत के लिए आर्थिक संसाधन जुटाना बताया गया है.
कांच पर चलने के लिए देना होगा इतना शुल्क: नरेंद्र नगर लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधिशासी अभियंता प्रवीण कुमार ने बताया कि कांच वाले हिस्से पर प्रवेश के लिए शुल्क निर्धारित कर दिया गया है. इसके तहत 18 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति से 100 रुपए और 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों व किशोरों से 50 रुपए शुल्क लिया जाएगा. वहीं, जो लोग केवल सेतु के डामर वाले हिस्से से आवागमन करना चाहते हैं, उन्हें किसी प्रकार का शुल्क नहीं देना होगा.
क्यों लिया जा रहा शुल्क? अधिशासी अभियंता प्रवीण कुमार के मुतबाकि, कांच वाला हिस्सा पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है और इस पर काफी ज्यादा संख्या में लोगों की आवाजाही होती है. ऐसे में इसकी सुरक्षा, नियमित सफाई, तकनीकी जांच और आवश्यक मरम्मत पर पर्याप्त खर्च आता है.
इसी को ध्यान में रखते हुए उपयोगकर्ता शुल्क लागू करने का निर्णय लिया गया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि शुल्क से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल केवल पुल के रखरखाव, सुरक्षा व्यवस्था और मरम्मत कार्यों पर किया जाएगा. ताकि, सेतु लंबे समय तक सुरक्षित और सुचारु रूप से संचालित हो सके.
बजरंग सेतु के शुरू होने के बाद यह पर्यटकों और श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन गया है. खासकर कांच वाले हिस्से पर चलकर गंगा और आसपास के प्राकृतिक दृश्यों का अनुभव लेने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं. अब शुल्क लागू होने के बाद भी उम्मीद जताई जा रही है कि पर्यटकों का उत्साह बना रहेगा और इससे सेतु के बेहतर रखरखाव में भी मदद मिलेगी.
बता दें कि बजरंग सेतु को आधुनिक तकनीक के साथ तैयार किया गया है. यह करीब 132.30 मीटर लंबा और 8.60 मीटर चौड़ा है. पुल के दोनों ओर पैदल यात्रियों के लिए कांच के फुटपाथ बनाए गए हैं. जबकि, मुख्य हिस्से में आवाजाही के लिए व्यवस्था की गई है. पैदल मार्ग में इस्तेमाल किया गया कांच कोई सामान्य कांच नहीं है. बल्कि, पांच परतों वाले टफेंड ग्लास का इस्तेमाल किया गया है.
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