ChatGPT Images 2.0 नई तकनीक के साथ यूजर्स को बेहतर, सटीक और मल्टीलिंगुअल इमेज बनाने की ताकत देता है जिससे क्रिएटिविटी बढ़ती है.
हैदराबाद: OpenAI ने मंगलवार को अपनी नई इमेज जनरेशन टेक्नोलॉजी ChatGPT Images 2.0 लॉन्च की है, जो पहले के मॉडल की तुलना में ज्यादा सटीक, उपयोगी और कॉन्टेक्स्ट को बेहतर तरीके से समझने वाली बताई जा रही है. यह नया मॉडल यूज़र्स द्वारा दिए गए प्रॉम्प्ट के आधार पर ज्यादा डिटेल्ड और सही विजुअल तैयार करने में सक्षम है. कंपनी के अनुसार, ChatGPT Images 2.0 को खासतौर पर बेहतर इंस्ट्रक्शन फॉलोइंग, मल्टीलिंग्विल रेंडरिंग और एडवांस्ड कंपोजिशन के लिए डिज़ाइन किया गया है. इसका मतलब है कि अब यूज़र्स मुश्किल डिज़ाइन, यूएआई एलिमेंट्स, टेक्स्ट-हेवी ग्राफिक्स और स्ट्रक्चर्ड लेआउट्स को पहले से भी ज्यादा आसानी से तैयार कर सकते हैं, जो पुराने सिस्टम्स के लिए चैलेंजिंग थे.
इस नए मॉडल की सबसे खास बात इसकी मल्टीलिंग्वल क्षमता है. यह हिंदी, बंगाली, चीनी, जापानी और कोरियाई जैसी भाषाओं में भी टेक्स्ट को ज्यादा सटीक और बेहतरीन तरके से विजुअल्स में शामिल कर सकता है. इससे पोस्ट, इंफोग्राफिक्स और एजुकेशनल कंटेंट तैयार करना और आसान हो जाता है. यह फीचर तब सबसे ज्यादा जरूरी हो जाता है, जब किसी डिज़ाइन में भाषा का काफी महत्व हो.
कई प्लेटफॉर्म्स पर रोलआउट
ChatGPT Images 2.0 को ChatGPT, Codex और API प्लेटफॉर्म पर रोलआउट किया जा रहा है. हालांकि, इसके एडवांस्ड फीचर्स जैसे रीज़निंग-बेस्ड क्षमताएं सिर्फ Plus, Pro और Business सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध होंगे. डेवलपर्स इसे gpt-image-2 API के जरिए इस्तेमाल कर सकते हैं, जहां कीमत इमेज की क्वालिटी और रेजोल्यूशन के आधार पर तय होगी.
यह मॉडल 2K तक के रिज़ॉल्यूशन में इमेज जनरेट कर सकता है, जबकि इससे अधिक रिज़ॉल्यूशन अभी बीटा स्टेज में है. इसके अलावा यह एक साथ आठ इमेज तक भी आउटपुट दे सकता है, जिनमें कैरेक्टर और ऑब्जेक्ट्स की कंसिस्टेंसी बनी रहती है. नई “thinking” क्षमता के कारण यह मॉडल अब ज्यादा मुश्किल टास्क संभाल सकता है. यह रीज़निंग-एनेबल्ड ChatGPT के साथ मिलकर वेब से जानकारी खोज सकता है, उसे वेरिफाई कर सकता है और उसी आधार पर इमेज भी बना सकता है. इसका नॉलेज कटऑफ दिसंबर 2025 तक अपडेट किया गया है.
हालांकि, कंपनी ने यह भी साफ किया है कि यह मॉडल अभी पूरी तरह परफेक्ट नहीं है. खासतौर पर कठिन फिजिकल स्ट्रक्चर, जैसे ओरिगामी या अजीब एंगल से दिखने वाली ऑब्जेक्ट्स को समझने में इसे दिक्कत हो सकती है. इसके अलावा, बहुत ज्यादा डिटेल या रिपिटिटिव पैटर्न वाले डिज़ाइन्स में भी कुछ सीमाएं सामने आ सकती हैं.
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