BPMS ने 8वें वेतन आयोग को सौंपे ज्ञापन में भत्ते, वेतन संरचना, भुगतान वितरण और कैलकुलेशन में कई बुनियादी बदलावों का प्रस्ताव दिया है.
नई दिल्ली: भारत सरकार ने 17 जनवरी 2025 को 8वें वेतन आयोग की घोषणा थी. केंद्रीय कैबिनेट ने 28 अक्टूबर 2025 को 8वें वेतन आयोग के लिए संदर्भ की शर्तें (Terms of Reference – ToR) को मंजूरी दी. जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई 8वें वेतन कमीशन की मौजूदा चेयरपर्सन हैं. आयोग को अपने गठन के 18 महीने के अंदर अपनी रिपोर्ट देनी होगी. 8वें वेतन आयोग ने मेमोरेंडम (ज्ञापन या सुझाव) जमा करने के लिए 30 अप्रैल 2026 की डेडलाइन तय की है. इसके बाद, आयोग अपने विश्लेषण, विचारों और सुझावों को अंतिम रूप देने से पहले अलग-अलग हितधारकों के प्रस्तावों में सुधार करेगा.
न्यूनतम वेतन 72,000 रुपये प्रति महीना
इस बीच, भारतीय प्रवासी मजदूर संघ (BPMS) ने हाल ही में 8वें वेतन आयोग को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है, जिसमें भत्ते, वेतन संरचना, भुगतान वितरण और कैलकुलेशन में कई बुनियादी बदलावों का प्रस्ताव है. BMPS ने मांग की है कि न्यूनतम वेतन को बढ़ाकर 72,000 रुपये प्रति महीना किया जाएगा. BPMS का कहना है कि यह आंकड़ा आर्थिक हकीकत और संबंधित हितधारकों की जीवन-यापन की जरूरतों को वित्तीय समझदारी के साथ संतुलित करेगा.
BPMS ने कहा है कि अगर इन बदलावों को शामिल किया जाता है, तो एंट्री-लेवल कर्मचारियों के लिए एक सम्मानजनक जीवन-स्तर सुनिश्चित होगा. सुझाव है कि न्यूनतम मजदूरी (Minimum Wage) को प्रति व्यक्ति आय वृद्धि से जोड़ा जाए ताकि एक अधिक तर्कसंगत और पारदर्शी सुधार सिस्टम बनाया जा सके.
BPMS ने अपने दावे के समर्थन में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के डेटा का हवाला दिया, जिसमें दिखाया गया है कि देश की प्रति व्यक्ति शुद्ध राष्ट्रीय आय 2016-17 में 1,03,219 रुपये से बढ़कर 2024-25 में 1,92,774 रुपये हो गई है. यह 86.76% की बढ़ोतरी है. BPMS का मानना है कि यह बढ़ोतरी सरकारी भुगतान और सैलरी में सही बढ़ोतरी की बात को साफ तौर पर साबित करती है.
सालाना वेतन वृद्धि दर 6% करने का सुझाव
इसके अलावा, BPMS ने मांग की है कि मौजूदा सिस्टम की तुलना में फिटमेंट फैक्टर 4 हो, जो कम से कम 18,000 रुपये के पेमेंट पर आधारित है. BPMS ने सालाना वेतन वृद्धि दर को 3% से दोगुना करके 6% करने का भी सुझाव दिया है. संघ का कहना है कि DA महंगाई को कम करता है, लेकिन असली आय वृद्धि के लिए वेतन वृद्धि जरूरी हैं. बढ़ते खर्च और प्राइवेट सेक्टर के मानकों को देखते हुए मौजूदा वेतन वृद्धि दर काफी नहीं है.
इसके अलावा, BPMS ने सैलरी कैलकुलेशन में इस्तेमाल होने वाले ‘फैमिली यूनिट’ कॉन्सेप्ट को 3 से 5 सदस्यों तक बदलने का प्रस्ताव दिया है, ताकि कर्मचारियों की अपने माता-पिता, जीवनसाथी और बच्चों के लिए वित्तीय जिम्मेदारी को सही तरह से दिखा जाए.
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