सल्ट जाख गांव में आज तक सड़क से नहीं जुड़ सका है. सरकारी विकास के दावों के बीच गांव की हकीकत आइना दिखा रही है.![]()
रामनगर: विकास के दावों के बीच सल्ट विकासखंड की जाख ग्रामसभा का पणचुरा तोक आज भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित है. इसका दर्द उस समय फिर सामने आया, जब कल 75 वर्षीय बुजुर्ग महिला भागुली देवी को उपचार के लिए ग्रामीणों को चारपाई पर लिटाकर करीब तीन किलोमीटर दूर सड़क तक पहुंचाना पड़ा. दुर्गम पहाड़ी रास्तों से गुजरते हुए ग्रामीणों ने लगभग दो घंटे की मशक्कत के बाद उन्हें वाहन तक पहुंचाया, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए ले जाया जा सका.
यह घटना एक बार फिर पहाड़ के उन गांवों की हकीकत बयां करती है, जहां आज भी बीमारी, बुजुर्गावस्था और आपात स्थिति में लोगों का सहारा सड़क नहीं, बल्कि ग्रामीणों के कंधे बनते हैं. भागुली देवी अपने बुजुर्ग पति के साथ पणचुरा गांव में रहती हैं,उनके तीनों बेटे गोविंद सिंह, गोपाल सिंह और दान सिंह रोजगार के सिलसिले में बाहर निजी क्षेत्रों में कार्यरत हैं. कुछ महीने पहले भागुली देवी घर के चबूतरे से गिरकर घायल हो गई थीं, चोट लगने के बाद उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाने की जरूरत थी, लेकिन गांव तक सड़क न होने के कारण समय पर उपचार संभव नहीं हो पाया, मजबूरी में उनका इलाज घर पर ही चलता रहा और उनकी स्थिति लगातार कमजोर होती गई.
हाल ही में गांव में आयोजित जागर और पूजा-पाठ कार्यक्रम में उनके तीनों बेटे घर पहुंचे, जब उन्होंने अपनी मां की बिगड़ती हालत देखी तो बेहतर इलाज के लिए उन्हें अपने साथ ले जाने का निर्णय लिया, इसके बाद गोपाल सिंह, दान सिंह, जगत सिंह और अन्य ग्रामीणों ने मिलकर भागुली देवी को चारपाई पर लिटाया और कठिन पहाड़ी रास्ते से सड़क तक पहुंचाने का अभियान शुरू किया. रास्ता आसान नहीं था, ऊबड़-खाबड़ पगडंडियां, चढ़ाई और उतराई से भरे तीन किलोमीटर लंबे सफर में ग्रामीणों को कई बार रुकना पड़ा. करीब दो घंटे की मेहनत के बाद बुजुर्ग महिला को मुख्य सड़क तक पहुंचाया जा सका, जहां से उन्हें वाहन के माध्यम से उपचार के लिए ले जाया गया.
ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है,सड़क सुविधा के अभाव में गांव के बीमार लोगों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को अक्सर इसी तरह चारपाई या डंडी-कंडी के सहारे अस्पताल पहुंचाना पड़ता है, रोजमर्रा की जरूरतें भी यहां चुनौती बनी हुई हैं. राशन, गैस सिलेंडर और अन्य आवश्यक सामान गांव तक पहुंचाने के लिए लोगों को लंबी पैदल दूरी तय करनी पड़ती है. स्थानीय निवासी जगत सिंह बताते हैं कि सड़क न होने के कारण गांव के अधिकांश लोग रोजगार और बेहतर सुविधाओं की तलाश में बाहर बस चुके हैं,गांव में अब ज्यादातर बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे ही रह गए हैं.
उन्होंने कहा कि भागुली देवी को भी सड़क तक पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को चारपाई का सहारा लेना पड़ा जो क्षेत्र की बदहाल स्थिति को दर्शाता है. वहीं युवा ग्रामीण राहुल रावत का कहना है कि पिछले 26 वर्षों में सड़क जाख तक तो पहुंच गई, लेकिन उससे आगे मात्र तीन किलोमीटर दूर स्थित पणचुरा गांव तक आज भी नहीं पहुंच सकी. इसका खामियाजा ग्रामीणों को हर दिन भुगतना पड़ रहा है. गौरतलब है कि सड़क निर्माण की मांग को लेकर पणचुरा के ग्रामीण वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं. पिछले साल पंचायत चुनाव के दौरान ग्रामीणों ने “सड़क नहीं तो वोट नहीं” का नारा देते हुए मतदान का बहिष्कार तक किया था.
उनका कहना था कि बार-बार मांग उठाने के बावजूद सड़क निर्माण की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. हालांकि चुनाव बीत गए, लेकिन सड़क का सपना आज भी अधूरा है.भागुली देवी की यह तस्वीर केवल एक बुजुर्ग महिला की पीड़ा नहीं, बल्कि उन सैकड़ों पहाड़ी ग्रामीणों की कहानी है जो आज भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का इंतजार कर रहे हैं,अब ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से जल्द सड़क निर्माण कर क्षेत्र को बुनियादी सुविधाओं से जोड़ने की मांग दोहराई है.
You may also like
-
18 अगस्त को लॉन्च हो सकती है 2026 Skoda Slavia फेसलिफ्ट, डिजाइन और फीचर्स में होंगे अपडेट
-
सावन में आस्था का अद्भुत संगम! मां अलकनंदा ने किया कोटेश्वर महादेव का जलाभिषेक, गुफा तक पहुंची नदी
-
बारिश का कहर! रुद्रप्रयाग में डेंजर लेवल के पास अलकनंदा, केदारनाथ यात्रा प्रभावित, मसूरी में मलबे में समाया रेस्टोरेंट
-
देहरादून में 16 करोड़ का पुल 16 दिन में ध्वस्त, पहली बारिश ही नहीं झेल सका, डीएम ने दिए कार्रवाई के निर्देश
-
Alert issued for very heavy rainfall in Uttarakhand; Char Dham Yatra suspended for two days; risk of flash floods.