उत्तराखंड में भाजपा ने 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए हारी हुई 23 सीटों पर विशेष रणनीति बनाई है। 13 से 16 जून तक सांसद और कोर ग्रुप इन सीटों पर प्रवास कर संगठन को मजबूत करेगा और मतदाताओं से संवाद करेगा।
राज्य ब्यूरो, जागरण, देहरादून। उत्तराखंड में भाजपा ने अपना पहला लक्ष्य हारी हुई 23 सीटों को रखा है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि 2027 की सत्ता का रास्ता इन्हीं विधानसभा क्षेत्रों से होकर निकलेगा, जहां पिछली बार मतदाताओं ने कमल को रोक दिया था।
इसलिए अब इन सीटों पर 13 से 16 जून तक सांसद, राज्यसभा सदस्य और भाजपा का पूरा कोर ग्रुप उतरने जा रहा है। प्रवास, रात्रि विश्राम, बूथ संवाद, प्रभावशाली मतदाताओं तक पहुंच और सामाजिक अभियानों के जरिये भाजपा उन दरारों को भरेगी, जिनके कारण इन विस. क्षेत्रों में पराजय मिली थी। इन प्रवास कार्यक्रमों को वर्ष 2027 के चुनावी रण की शुरुआती व्यूह-रचना माना जा रहा है।
13 से 16 जून तक सांसद, राज्यसभा सदस्य और भाजपा का पूरा कोर ग्रुप उतरने जा रहा
13 जून से हारी हुई सभी 23 विधानसभा सीटों पर भाजपा सांसद, राज्यसभा सदस्य और कोर ग्रुप के वरिष्ठ नेता पहुंचकर प्रवास करेंगे और रात्रि विश्राम भी करेंगे। इसके जरिए पार्टी न केवल स्थानीय संगठन की सक्रियता का आकलन करेगी, बल्कि उन कारणों को भी समझने का प्रयास करेगी, जिनके चलते इन विस. क्षेत्रों में अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी।
अभियान के तहत विधानसभा कोर ग्रुप, शक्ति केंद्रों की बैठक और प्रबुद्धजनों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही जैविक एवं प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों के साथ विशेष संवाद भी किया जाएगा। इसकी थीम धरती को जहर से बचाना तय की गई है।
भाजपा का माना है कि पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक खेती जैसे मुद्दे ग्रामीण समाज में तेजी से महत्व पा रहे हैं। इनके माध्यम से नए सामाजिक वर्गों तक पहुंच बनाई जा सकती है।
500 प्रभावशाली लोग से संपर्क
भाजपा प्रत्येक जिले में लगभग 500 प्रभावशाली मतदाताओं की सूची तैयार कर रही है। इनमें समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े ऐसे लोग शामिल किए जा रहे हैं, जिनकी राय स्थानीय जनमत को प्रभावित करती है।
सामाजिक सरोकार के साथ चुनावी रणनीति
अभियान के दौरान पौधारोपण और स्वच्छता कार्यक्रम भी आयोजित होंगे। भाजपा इन कार्यक्रमों के जरिए सामाजिक सरोकारों को चुनावी रणनीति के साथ जोड़ने का प्रयास कर रही है।
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