आईआरजीसी ने कहा कि उसकी नेवी और एयरोस्पेस फोर्से ने बहरीन में शेख ईसा एयर बेस पर अमेरिकी सैनिकों के ठिकानों को निशाना बनाया.![]()
तेहरान: ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने मंगलवार को कहा कि उसने अपने ‘ऑपरेशन नस्र 2’ के तीसरे चरण के दौरान बहरीन और कुवैत में अमेरिकी मिलिट्री ठिकानों पर हमले किए. ये अटैक तेहरान पर हालिया अमेरिकी हमलों का बदला था.
आईआरजीसी के एक बयान और ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (IRIB) के मुताबिक, इस ऑपरेशन में बहरीन और कुवैत में अमेरिकी मिलिट्री ठिकानों पर एक साथ मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए.
आईआरजीसी ने कहा कि उसकी नेवी और एयरोस्पेस फोर्सेज ने बहरीन में शेख ईसा एयर बेस पर कई हथियार और इक्विपमेंट स्टोरेज शेड, साथ ही अमेरिकी जहाजों और एयरक्राफ्ट के पार्ट्स को निशाना बनाया. इसमें आगे कहा गया कि ऑपरेशन ने कुवैत में अली अल सलेम एयर बेस पर एमक्यू-9 ड्रोन की तैनाती के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले रैंप पर हमला किया, जिससे कई ड्रोन नष्ट हो गए.
बयान में कहा गया, ‘ऑपरेशन नस्र 2 की तीसरी लहर में आईआरजीसी नेवी और एयरोस्पेस फोर्सेज के बहादुर योद्धाओं ने कुछ घंटे पहले बहरीन में शेख ईसा बेस पर एक साथ मिसाइल और ड्रोन ऑपरेशन के दौरान दुश्मन के जहाजों और एयरक्राफ्ट के लिए कई हथियार और पार्ट्स स्टोरेज शेड को नष्ट कर दिया.’
इसमें आगे कहा गया, ‘उन्होंने कुवैत में अली सलेम बेस पर दुश्मन के एमक्यू-9 ड्रोन की तैनाती के रैंप पर भी हमला किया, जिससे कई ड्रोन नष्ट हो गए या उन्हें नुकसान पहुंचा.’ बयान के मुताबिक ये हमले आईआरजीसी के बताए अनुसार दिन में पहले ईरान के कई तटीय मिलिट्री ठिकानों पर अमेरिकी मिलिट्री हमलों के जवाब में किए गए थे.
बयान में कहा गया, ‘जब तक अमेरिका के जुर्म जारी रहेंगे, हमलावरों पर जवाबी कार्रवाई और सजा जारी रहेगी, और अगर ये हमले दोबारा हुए, तो उन्हें हैरान करने वाले जवाब मिलेंगे.’ आईआरजीसी ने यह भी चेतावनी दी कि इस इलाके में अमेरिकी मिलिट्री कार्रवाई जारी रहने से एनर्जी एक्सपोर्ट पर असर पड़ेगा, यह दावा करते हुए कि ‘जब तक इस इलाके में अमेरिका की बुराइयां मौजूद हैं, तब तक इस इलाके से तेल या गैस की एक भी बूंद एक्सपोर्ट नहीं की जाएगी. साथ ही यह भी कहा कि ऐसी कार्रवाइयों से होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने में सिर्फ देरी होगी.’
दिन में पहले अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि अमेरिकी सेना ने 13 जुलाई को रात 10:15 बजे ईस्टर्न टाइम पर ईरानी मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर पर कोऑर्डिनेटेड हमलों की एक और सीरीज पूरी कर ली है. मिलिट्री कमांड के मुताबिक पांच घंटे के ऑपरेशन में बुशहर, चाह बहार, जस्क, कोनारक, अबू मूसा और बंदर अब्बास में ईरान के दक्षिणी तट पर मौजूद खास ठिकानों को निशाना बनाया गया.
सेंटकॉम ने कहा कि ईरानी कोस्टल डिफेंस सिस्टम, मिसाइल लॉन्च इंफ्रास्ट्रक्चर, ड्रोन पोजीशन और नौसैनिक क्षमताओं को बेअसर करने के लिए प्रिसिजन-गाइडेड हथियार तैनात किए गए थे. अमेरिकी मिशन का बताया गया मकसद होर्मुज से गुजरने वाले कमर्शियल शिपिंग लेन को खतरे में डालने की तेहरान की क्षमता को सिस्टमैटिक तरीके से कम करना है.
ये दुनिया के सबसे जरूरी समुद्री ट्रेड कॉरिडोर में से एक है. अमेरिकी मिलिट्री ने बताया कि मिडिल ईस्ट में 50,000 से ज़्यादा अमेरिकी सर्विस मेंबर अभी भी तैनात हैं. इससे इस बात पर जोर दिया गया कि सेना लड़ाई के लिए तैयार है. हाल की बातचीत से पता चलता है कि पश्चिम एशिया में लड़ाई बहुत ज़्यादा बढ़ गई है, जो ईरान के अंदर टारगेटेड अमेरिकी हमलों से बढ़कर खाड़ी के पार मौजूद अमेरिकी मिलिट्री ठिकानों पर सीधे जवाबी हमलों तक पहुँच गई है.
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